मिज़ाज़ बदल इरादे नही
बेवजह चीखने से
ये सर्द सन्नाटे सही
दफन ना कर अच्छाई को अपनी
विदा करना ही है तो
गीले शिकवे और बुराई को कर,
हर दफा नही होता वो जो तू चाहे
लेकिन मत हावी होने दे
इस ग़ुस्से को खुद पर।
झुकी हुई नज़रे भी उतनी ही ज़रूरी है
जितनी तनी हुई छाती
तेरी बातो से तेरा जुनून दिखना चाहिए
गुरूर नही
तेरा डर मिटता है जहा
तेरी हिम्मत जन्म लेती है वहीं।।