डर डरावना है
हमरी कल्पनाओ का
ये टूटा खिलौना है
बचपन से हमारे साथ
आंख मिचौली है खेलता
जहा हमारी हिम्मत काँपती
वहा ये दीमक की तरह है फैलता
ये है कूकर की सिटी जैसा
ये हमें चेताता है कि
तेरी तैयारी शायद कम है
लेकिन BOSS तू दुनिया बदल दे
इतना तुझमें दम है
बीजल कड़क रही हो तो
सहमे मत
आंधी के डर से
मत कर बंद हिम्मत के पट
ललकार उस डर को
के मैं इतना कमजोर नही
अब तू देख तेरा फायदा मैं कैसे उठाता हूं
तुझे ही ढाल बना के हर जंग जीत के दिखता हूं।
हमरी कल्पनाओ का
ये टूटा खिलौना है
बचपन से हमारे साथ
आंख मिचौली है खेलता
जहा हमारी हिम्मत काँपती
वहा ये दीमक की तरह है फैलता
ये है कूकर की सिटी जैसा
ये हमें चेताता है कि
तेरी तैयारी शायद कम है
लेकिन BOSS तू दुनिया बदल दे
इतना तुझमें दम है
बीजल कड़क रही हो तो
सहमे मत
आंधी के डर से
मत कर बंद हिम्मत के पट
ललकार उस डर को
के मैं इतना कमजोर नही
अब तू देख तेरा फायदा मैं कैसे उठाता हूं
तुझे ही ढाल बना के हर जंग जीत के दिखता हूं।
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