Tuesday, July 10, 2018

डर का गणित

डर डरावना है
हमरी कल्पनाओ का
ये टूटा खिलौना है

बचपन से हमारे साथ
आंख मिचौली है खेलता
जहा हमारी हिम्मत काँपती
वहा ये दीमक की तरह है फैलता

ये है कूकर की सिटी जैसा
ये हमें चेताता है कि 
तेरी तैयारी शायद कम है
लेकिन BOSS तू दुनिया बदल दे
इतना तुझमें दम है

बीजल कड़क रही हो तो
सहमे मत
आंधी के डर से
मत कर बंद हिम्मत के पट

ललकार उस डर को
के मैं इतना कमजोर नही

अब तू देख तेरा फायदा मैं कैसे उठाता हूं
तुझे ही ढाल बना के हर जंग जीत के दिखता हूं।



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