Thursday, June 14, 2018

मेरे तरकश में कई तीर है

मेरे तरकश में कई तीर है
कुछ तीरो में साहस की चमक है
कुछ तीरो में कमज़ोरियों की जंग
कुछ तीर मेरे हौसलो की तरह पक्के है
कुछ तीर मेरे निशाने से भटके है

हर तीर मैने मेहनत की आँखों से

सुखी लकड़ी देख कर चुना है
धातु को रगड़ कर
आग की लपटों में भूना है
बार बार उसे ठंडा कर फिर पकाया है
ताकि उनमे कोई कमी न रहे
लेकिन मेरे डर की दीमक ने
कुछ तीर खोखले कर दिए है
जो धार कोई पत्थर ना मोड़ पाए
वो मैने खुद कमज़ोर कर दिए है

मैं खुद भूल जाता हूं 

अगर निशाना मछ्ली की आँख है
तो मेरे बाज़ू में भी तो दम हो
सिर्फ मेरे तीर अछे होने से फर्क नहीं पड़ता
अगर चलाना ना आये तो तोप भी किस काम की

अगर चूक जाए निशाना तो दोष तिरो का नही

मन ही बावला हो तो वो दिमाग क्या करे

अब पकड़ के बाण अपने सपनो का
लगा के बाज़ी अपनी खूबी से 
पूरे ज़ोर ओर विश्वास से तीर छोडूंगा
और जीत की चादर अपने बदन पे ओढुंगा

एकाग्रता अनुशासन और मन मे धीर है
गर्व है के मेरे इरादे वीर है
मेरे तरकश में कई तीर है
मेरे तरकश में कई तीर है।।


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