Saturday, June 16, 2018

एक नन्हा पौधा

एक नन्हा पौधा पनप रहा था
जल बून्द बन बरस रहा था
उजाला तो था लेकिन कुछ ज़्यादा ही गरम हवा
एक प्यारा पंछी झुलस गया था

हवा ने अपना रूख ऐसा मोड़ा
एक बूढ़ा वृक्ष जो लड़ रहा था अपनी ही जड़ो से
वो कुछ देर में ज़मीन पर ढेर पड़ा था

उस नन्हे पौधे ने जब ये सब देखा
उसका मन दहल उठा
अभी आइ ही थी दो पल कोपल
सहमा पौधा डर से मरहूम हो गया

तभी एक चिड़िया उछल पड़ी
अगर हिम्मत रखता तो उडान भरता बड़ी
दो दिन में तूफान थम गया
बौछार से नन्हा बीज फिर पनप गया


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